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Patna High Court: टेंडर घोटाले में 6 अधिकारियों के नाम, FIR सिर्फ 3 पर क्यों? हाईकोर्ट ने SVU से मांगा जवाब

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना हाईकोर्ट ने सरकारी टेंडर में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छह अधिकारियों के नाम सामने आने पर केवल तीन के खिलाफ FIR दर्ज होने का आधार पूछा।

पटना, 17 अक्टूबर: बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर अहम सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने रिशुश्री की याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा कि जब मामले में छह अधिकारियों के नाम सामने आए, तो प्राथमिकी केवल तीन के खिलाफ ही क्यों दर्ज की गई। अदालत ने इस अंतर का आधार स्पष्ट करने की जरूरत जताई है।


सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों का केंद्र यह रहा कि मामले से जुड़े सभी संभावित लोगों की भूमिका की जांच समान रूप से की गई है या नहीं। अदालत ने याचिकाकर्ता की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए आशंका जताई कि असली भूमिका निभाने वाले लोग पर्दे के पीछे हो सकते हैं।


छह अधिकारियों के नाम पर अदालत ने मांगा जवाब


मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन छह अधिकारियों को लेकर उठा, जिनके नाम कथित तौर पर सामने आए थे। अदालत ने जानना चाहा कि यदि जांच के दौरान इतने अधिकारियों की भूमिका चर्चा में आई, तो विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने केवल तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय क्यों लिया।


अदालत के सवाल का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्राथमिकी दर्ज करने के लिए क्या आधार अपनाया गया और बाकी अधिकारियों के संबंध में जांच एजेंसी ने क्या कदम उठाए। इस मुद्दे पर एजेंसी का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई के आधार को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।


ED और SVU की जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल


इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और धन के अवैध लेनदेन से जुड़े आरोपों की जांच में विभिन्न लोगों की भूमिका का आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी सवाल किया कि कहीं कुछ लोगों को बचाने और दूसरों को फंसाने जैसी स्थिति तो नहीं है। ये सुनवाई के दौरान व्यक्त की गई न्यायिक टिप्पणियां हैं। इन्हें किसी जांच एजेंसी या संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष अथवा दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।


SVU के ADG को हलफनामा देने का निर्देश


पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को SVU के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही, ADG से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि कथित तौर पर सामने आए बाकी अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।


इस निर्देश के बाद जांच एजेंसी को प्राथमिकी दर्ज करने के आधार और संबंधित अधिकारियों के संबंध में की गई कार्रवाई पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। अदालत के सामने यह बताना महत्वपूर्ण होगा कि किन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और बाकी के संबंध में क्या निर्णय लिया गया।


जांच की निष्पक्षता पर टिकी निगाहें


सरकारी टेंडरों से जुड़े मामलों में जांच की पारदर्शिता और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निष्पक्ष आकलन महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी मामले में कई अधिकारियों के नाम सामने आते हैं, तो जांच एजेंसी के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी होता है कि किसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई।


इस मामले में हाईकोर्ट के सवालों ने जांच की दिशा और प्राथमिकी दर्ज करने के आधार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब SVU के ADG के हलफनामे और जांच एजेंसियों के स्पष्टीकरण पर निगाह रहेगी।


अगली सुनवाई में जवाब अहम


फिलहाल उपलब्ध जानकारी में अगली सुनवाई की तारीख और एजेंसियों के विस्तृत जवाब का उल्लेख नहीं है। अदालत के निर्देश के बाद मामले में आगे की कार्यवाही इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच एजेंसी अपने निर्णय के समर्थन में क्या तथ्य प्रस्तुत करती है।


यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत की टिप्पणियां जांच से जुड़े सवालों और स्पष्टीकरण की जरूरत को दर्शाती हैं। मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।


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